*‘दिल चीज क्या है…’ के सुरों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध; आशा भोसले को सुरों के माध्यम से श्रद्धांजलि*

*‘दिल चीज क्या है…’ के सुरों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध; आशा भोसले को सुरों के माध्यम से श्रद्धांजलि*

*सुनहरे दौर की शलाका से सजी यादगार गीतों की अविस्मरणीय महफिल*

पुणे : संगीत प्रेमियों के लिए ‘दिशा’ की ओर से “सुनहरे दौर की शलाका” नामक विशेष संगीत कार्यक्रम का आयोजन बालशिक्षण भवन के सभागार में बड़े उत्साह के साथ किया गया। पुराने हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की अभिनेत्रियों और उनके अमर गीतों पर आधारित इस महफिल ने उपस्थित श्रोताओं को सुरों भरी यादों की दुनिया में पहुंचा दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वरिष्ठ गायिका आशा भोसले को समर्पित सुरमयी श्रद्धांजलि रहा। उनके अमर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत यह श्रद्धांजलि श्रोताओं के दिल को छू गई।

महफिल में ‘दिल चीज क्या है’,
दुनिया मे लोगों को, जाने जा, जीवन पे हर मोड पर, निगाहे मिलाने को, ‘ये रात भीगी भीगी’, ‘इस मोड़ से जाते हैं’, ‘रुक जा रात ठहर जा रे चंदा’, ‘आप के हसीन रुख पे’, ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ तथा ‘कौन है जो सपनों में आया’ जैसे कई सदाबहार गीत प्रस्तुत किए गए। ग़ज़ल, ठुमरी, प्रेम गीत और विरह गीतों के विभिन्न रंगों ने कार्यक्रम को और भी खूबसूरत बना दिया, वहीं श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

इस महफिल में सुप्रसिद्ध गायिका शलाका घैसास ने अपने मधुर और भावपूर्ण स्वर से श्रोताओं का दिल जीत लिया। साथ ही गायक अजय राव, प्रसाद केळकर और अतुल किल्लेदार ने भी अपने शानदार प्रस्तुतीकरण से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। हर गीत में भावनाओं की सटीक अभिव्यक्ति और सुरों की सुंदर प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम की संकल्पना और आयोजन शलाका घैसास द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन मनीष गोखले ने बेहतरीन ढंग से संभाला। उनके जानकारीपूर्ण और रोचक संचालन से हर गीत की पृष्ठभूमि श्रोताओं तक प्रभावी रूप से पहुंची।

वाद्य संगत में अमन सैय्यद, ओंकार पाटणकर, हार्दिक रावल, विशाल गंड्रतवार, संजय खाडये और चारू किंजवाडकर का योगदान भी सराहनीय रहा। उनकी सुरमयी संगत ने कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध बनाया।

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